|| यीशु ने कहा, "देखो, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ। मेरा पुरस्कार मेरे पास है और मैं प्रत्येक मनुष्य को उसके कर्मों का प्रतिफल दूँगा। मैं अल्फा और ओमेगा; प्रथम और अन्तिम; आदि और अन्त हूँ।" Revelation 22:12-13     
Home

My Profile

Topics

Words Meaning

Promises of God

Images

Songs

Videos

Feed Back

Contact Us

Visitor Statistics
» 1 Online
» 21 Today
» 31 Yesterday
» 21 Week
» 857 Month
» 3477 Year
» 45702 Total
Record: 15396 (02.03.2019)

यीशु मसीह के क्रूस-वाणी का सार


 

[31.03.2021]

यीशु मसीह का क्रूस-वाणी [ उक्तियों ]की शिक्षा का सारांश‌।

1.लूका 23:32-34 -

[32]वे और दो मनुष्यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले।

[33]जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुंचे, तो उन्होंने वहां उसे और उन कुकिर्मयों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया।

✝ [34]तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए।

 

* Forgiveness (पाप-क्षमा ; छुटकारा ; क्षमा) -

- जो लोग यीशु मसीह के दुश्मन, बैरी और विरोधी थे - उन्हीं लोगों ने यीशु को सूली चढ़वाया और प्रभु यीशु ने इन्हीं लोगों के लिए परमेश्वर पिता से क्षमा माँगा।

- यीशु को पाप क्षमा करने का अधिकार था किन्तु वह पश्चाताप आवश्यक समझते थे। किसी भी कीमत पर पाप की जोखिम से बचने का परामर्श देते थे और किसी के लिए पाप का कारण नहीं बनने की चेतावनी भी देते थे। - Mt5:29-30; Mt18:6-9.

 

•1 पतरस 3:18 -

[18]इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए: वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।

 

•1 कुरिन्थियों 15:3 -

[3]इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

2.लूका 23:39-43 -

[39]जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्दा करके कहा; क्या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा।

[40]इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्ड पा रहा है।

[41]और हम तो न्यायानुसार दण्ड पा रहे हैं, क्योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।

[42]तब उस ने कहा; हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।

✝ [43]उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूॅं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा

 

* Salvation (पाप-मुक्ति ; उध्दार ) -

- मसीह कि मुख्य उद्देश्य था -- मनुष्यों को पाप से मुक्त करना।

- पापों से मुड़कर परमेश्वर की ओर लौटना। 

- जिस तरह पश्चातापी कुकर्मी अपने सब पाप व गुनाहों को स्वीकार किया और यीशु को मसीह माना। 

• Mt4:17 - यीशु ने कहा,"पश्चाताप करो ! क्योंकि स्वर्ग का निकट आ गया है।"  

क्योंकि पश्चाताप के बिना उध्दार नहीं हो सकता। 

•यूहन्ना 1:29 - दूसरे दिन उस ने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।

- मुक्ति का कार्य सम्पन्न करने फलस्वरूप यीशु परमेश्वर और मनुष्यों के मध्यस्थ बने।

• प्रेरितों के काम 16:31-

[31]उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

3.यूहन्ना 19:25-27 -

[25]परन्तु यीशु के क्रूस के पास उस की माता और उस की माता की बहिन मरियम, क्लोपास की पत्नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी।

✝ [26]यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा; हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है

✝ [27]तब उस चेले से कहा, यह तेरी माता है, और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया॥ 

 

* Relationship (सम्बन्धी ; रिश्ता ; प्रेम ) -

यीशु ने क्रूस पर अपनी माता को अपने प्रिय शिष्य यूहन्ना के हाथों सौंपा था।

•मत्ती 12:50 -

[50]क्योंकि जो कोई मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चले, वही मेरा भाई और बहिन और माता है।

•लूका 11:28 -

[28]उस ने कहा, हाॅं; परन्तु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।

 

•प्रेरितों के काम 2:47 -

[47]और परमेश्वर की स्तुति करते थे, और सब लोग उन से प्रसन्न थे: और जो उद्धार पाते थे, उन को प्रभु प्रति दिन उन में मिला देता था।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

4.मत्ती 27:45-46 -

[45]दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्धेरा छाया रहा।

✝ [46]तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?

 

* Abandonment ( त्यागना ; आत्म-समर्पण ; आत्मत्याग) -

•मत्ती 10:37-39 -

[37]जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं।

[38]और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं।

[39]जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।

•प्रेरितों के काम 4:37 (बरनबास अर्थात् सान्त्वना-पुत्र) -

[37]उस की कुछ भूमि थी, जिसे उस ने बेचा, और दाम के रूपये लाकर प्रेरितों के पांवों पर रख दिए॥

•2 तीमुथियुस 2:22 -

[22]जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।

 

•1 तीमुथियुस 2:5 -

[5]क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

5.यूहन्ना 19:28-29 -

✝ [28]इस के बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ हो चुका; इसलिये कि पवित्र शास्त्र की बात पूरी हो कहा, मैं प्यासा हूॅं।

[29]वहां एक सिरके से भरा हुआ बर्तन धरा था, सो उन्होंने सिरके में भिगोए हुए इस्पंज को जूफे पर रखकर उसके मुंह से लगाया।

 

* Distress ( कष्ट ; दुःख-तकलीफ ; अति क्लेश ; पीड़ा ; दुख उठाना) -

•इब्रानियों 2:9-10

[9]पर हम यीशु को जो स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे।

[10]क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।

•इब्रानियों 12:2 -

[2]और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।

•इब्रानियों 2:14,15-

[14] परिवार के सभी सदस्यों का रक्त-मास एक ही होता है, इसलिए वह भी हमारी तरह मनुष्य बन गये जिससे वह अपनी मृत्यु द्वारा मृत्यु पर अधिकार रखने वाले शैतान को परास्त करें।

[15] और दास्तां में जीवन बिताने वाले मनुष्यों को मृत्यु के भय से मुक्त कर दें।

 

•यशायाह 53:5 -

[5]परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

6.यूहन्ना 19:30 -

✝ [30]जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा "पूरा हुआ" और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए।

 

* Triumph ( जयवन्त होना ; जय पाना ; विजय ) - 

•1 कुरिन्थियों 15:54-57 -

[54]और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा :

"जय ने मृत्यु को निगल लिया।

[55]हे मृत्यु, तेरी जय कहाॅं रही ?

हे मृत्यु, तेरा डंक कहाॅं रहा ?"

[56]मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है।

[57]परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्त करता है।

 

•इब्रानियों 10:10-14 -

[10]उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं।

[11]और हर एक याजक तो खड़े होकर प्रति दिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते; बार बार चढ़ाता है।

[12]पर यह व्यक्ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ा कर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।

[13]और उसी समय से इस की बाट जोह रहा है, कि उसके बैरी उसके पांवों के नीचे की पीढ़ी बनें।

[14]क्योंकि उस ने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

 

7.लूका 23:44-46 -

[44]और लगभग दो पहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अन्धियारा छाया रहा।

[45]और सूर्य का उजियाला जाता रहा, और मन्दिर का परदा बीच में फट गया।

✝ [46]और यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा; हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूॅं: और यह कहकर प्राण छोड़ दिए।

 

* Reunion ( पुनःसंयोग ; दुबारा मेल कराना‌ ; मेल-मिलाप ) -

•2 कुरिन्थियों 5:18 -

[18]और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।

•रोमियो 5:11-

[11]और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं॥

•यूहन्ना 17:21-

[21] सब-के-सब एक हो जायें।हे पिता, जिस तरह तू मुझ में है और मैं तुझ में,उसी तरह वे भी एक हो जायें, जिससे संसार यह विश्वास करें कि तूने मुझे भेजा।

•मरकुस 15:39 -

[39]जो सूबेदार उसके सम्हने खड़ा था, जब उसे यूं चिल्लाकर प्राण छोड़ते हुए देखा, तो उस ने कहा, सचमुच यह मनुष्य, परमेश्वर का पुत्र था।

प्रेरितों के काम 16:31-

[31]उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।

•यूहन्ना 14:6 -

[6]यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूॅं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------


Disclaimer     ::     Privacy     ::     Login
Copyright © 2019 All Rights Reserved