पवित्र आत्मा का उतरना [The Holy Spirit Comes at Pentecost]
प्रेरितों के काम 2:1-13-
[1] जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे।
When the day of Pentecost came, they were all together in one place.
[2] एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया।
Suddenly a sound like the blowing of a violent wind came from heaven and filled the whole house where they were sitting.
[3]और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं।
They saw what seemed to be tongues of fire that separated and came to rest on each of them.
[4] वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।
All of them were filled with the Holy Spirit and began to speak in other tongues as the Spirit enabled them.
[5] आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रह रहे थे।
Now there were staying in Jerusalem God-fearing Jews from every nation under heaven.
[6]जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।
When they heard this sound, a crowd came together in bewilderment, because each one heard them speaking in his own language.
[7] वे सब चकित और अचम्भित होकर कहने लगे; “देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं?
Utterly amazed, they asked: “Are not all these men who are speaking Galileans?
[8]तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है?
Then how is it that each of us hears them in his own native language?
[9]हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसोपोटामिया और यहूदिया और कप्पदूकिया और पुन्तुस और आसिया।
Parthians, Medes and Elamites; residents of Mesopotamia, Judea and Cappadocia, Pontus and Asia,
[10]और फ्रूगिया और पंफूलिया और मिस्र और लीबिया देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी,
Phrygia and Pamphylia, Egypt and the parts of Libya near Cyrene; visitors from Rome
[11] अर्थात् यहूदी और यहूदी मत धारण करनेवाले, क्रेती और अरबी भी हैं, परन्तु अपनी अपनी भाषा में उनसे परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।
(both Jews and converts to Judaism); Cretans and Arabs—we hear them declaring the wonders of God in our own tongues!”
[12]और वे सब चकित हुए, और घबराकर एक दूसरे से कहने लगे, “ यह क्या हुआ चाहता है?”
Amazed and perplexed, they asked one another, “What does this mean?”
[13]परन्तु दूसरों ने ठट्ठा करके कहा, “ वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।”
Some, however, made fun of them and said, “They have had too much wine.”
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वचन का व्याख्यान
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पवित्र आत्मा का उतरना (कलीसिया का जन्म) -
[1] जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। When the day of Pentecost came, they were all together in one place.
पिन्तेकुस्त [Pentecost]-
पिन्तेकुस्त शब्द कोइन ग्रीक (Koine Greek) रोमनकृत: pentēkostē , शाब्दिक रूप से 'पचासवाँ' से आया है। सेप्टुआजेंट (Septuagint) में "पिन्तेकुस्त" का एक अर्थ हिब्रू बाईबल , कोइन अनुवाद , शवोत ( Shavuot) को संदर्भित करता है , जो तीन तीर्थयात्रा त्योहारों में से एक है, जिसे व्यवस्थाविवरण 16:10 निर्गमन 34:22 अनुसार फसह के पचासवें दिन मनाया जाता है , जहाँ इसे "सप्ताहों का त्योहार" (कोइन ग्रीक: , रोमनकृत: heortēn hebdomádōn ) कहा जाता है, अर्थात् “पिन्तेकुस्त” शब्द का अर्थ है – 50वां दिन।
पुराना नियम एवं नया नियम में इसका अलग अलग अर्थ है –
पुराना नियम – पिन्तेकुस्त का दिन एक वार्षिक पर्व था जो कि प्रथम फलों के पर्व के सप्ताहों के एक सप्ताह अर्थात् 7 सप्ताहों या 49 दिनों बाद आता था और इसलिए यह सप्ताहों का पर्व भी कहलाता था (लैव्य.23:15-22)।
पिन्तेकुस्त नाम यूनानी मूल से है, जिसका अर्थ 50 है क्योंकि प्रथम-फलों के पर्व के बाद यह 50 वां दिन था (लैव्य.23:16)।
पिन्तेकुस्त, या कटनी का पर्व अर्थात् फसल की समाप्ति का पर्व, एक यहूदी पर्व था जो फसह के पर्व के पचास दिन के बाद आता था; इसमें गेहूं की फसल की कटनी का उत्सव मनाया जाता था (लैव्य.23:15-21; व्य.16:9-11)
पिन्तेकुस्त का दिन – मुख्यतः यहूदियों के वार्षिक पर्वों में फसह, अखमीरी रोटी, कटनी का पर्व (पहले पूले के पर्व के बाद) तथा झोपड़ियों का पर्व आदि मनाई जाती रही हैं (लैव्य.23:1-44)।
यह पहले पूले का पर्व अर्थात् कटनी का पर्व के बाद 50वां दिन में आता था तथा यह मसीह के पुनरुत्थान का एक प्रतीक माना जाता है (1कुरि.15:23)।
पिन्तेकुस्त यहूदियों के सप्ताहों के पर्व के लिए यूनानी नाम था, इसे ऐसा इसलिए कहा जाता था क्योंकि यह प्रथम पूले के पर्व के 07दिन (एक सप्ताह) सप्ताहों के बाद आता था। यह गेहूं के फसल की कटनी का पर्व था (निर्ग.23:16)।
प्रेरित 2 में पिन्तेकुस्त का यह दिन कलीसिया के आरम्भ को चिन्हित करता है (मत्ती16:18)।
यह होरेस या सीनै (Sinai) पर्वत पर मूसा-संहिता की घोषणा का स्मरणोत्सव भी था।
1.परमेश्वर ने मूसा को दर्शन दिया – निर्ग.3:1, प्रेरितों 7:30.
2.परमेश्वर ने इस्राइलियों को प्रजा बनाया और व्यवस्था दी – निर्ग.19:1-20; 20:1-26; 24:16; 34:1-4,29, लैव्य.7:37-38;27:34; व्य.1:6,19; 5:1-2, 1राजा 8:9, प्रेरितों 7:38)
3. नई पीढ़ी के लोगों ने कनान देश में प्रवेश किया – गिनती 1:19,10:12,14:31-34,26:63-65।
नया नियम – फसह पर्व के एक दिन बाद यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था। यीशु के पुनरूत्थान से स्वर्गारोहण तक की अवधि में प्रभु यीशु 40 दिनों तक संसार में लोगों (प्रेरितों, सगे-संबंधियों तथा अन्य लोग) को दिखाई देते रहे। यीशु के स्वार्गारोहण के 10 दिन बाद पिन्तेकुस्त का पर्व 50वें दिन में मनाया जाता है। पिन्तेकुस्त पर्व के दिन ही पवित्र आत्मा प्रेरितों पर उतरा था।
•40 दिन:- यीशु अपने पुनरुत्थान के बाद 40 दिनों तक अपने शिष्यों को दिखाई देते रहे।
•10 दिन:- 40 दिनों के बाद, यीशु स्वर्गारोहण कर गए।
•50 दिन:- यीशु के स्वर्गारोहण के 10 दिन बाद, यानि पुनरुत्थान के 50वें दिन (पिन्तेकुस्त का दिन), पवित्र आत्मा प्रेरितों पर उतरा।
उस समय, मसीह के अनुयायी जिस जगह पर एकत्रित थे, वह स्थान या घर निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है जैसा कि लूका ने लिखा कि “वे सब एक जगह इकट्ठे थे।” तथापि, उस स्थान को एक घर कहा गया है (प्रेरि.2:2)।
प्रेरित 7:46-48-
46. उस पर परमेश्वर ने अनुग्रह किया, सो उस ने बिनती की, कि मैं याकूब के परमेश्वर के लिये निवास स्थान ठहराऊं।
47. परन्तु सुलैमान ने उसके लिये घर बनाया।
48. परन्तु परमप्रधान हाथ के बनाए घरों में नहीं रहता, जैसा कि भविष्यद्वक्ता ने कहा।
[2] एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। Suddenly a sound like the blowing of a violent wind came from heaven and filled the whole house where they were sitting.
[3]और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। They saw what seemed to be tongues of fire that separated and came to rest on each of them.
एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द था लेकिन आंधी नहीं।
प्रेरित.4:31 - जब वे प्रार्थना कर चुके, तो वह स्थान जहां वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए, और परमेश्वर का वचन हियाव से सुनाते रहे।
“आंधी” और “आग” के सन्दर्भ महत्वपूर्ण हैं। आत्मा के लिए शब्द “नोए” (नूमा) से संबंधित है। यहां पर जिस शब्द का अनुवाद “आंधी” किया गया है, उसका अर्थ “श्वास” भी है। दोनों संज्ञाएं – “आत्मा” और “हवा या आंधी” या “श्वास”, “नोए” क्रिया से है, “चलना, श्वास लेना”। “आकाश से बड़ी आंधी के चलने का सा शब्द” पवित्र आत्मा की सामर्थ और उसके आगमन की पूर्णता को दर्शाता है।
“आग की जीभें” परमेश्वर की उपस्थिति का चित्रण है। पुराने नियम में अनेक बार परमेश्वर ने स्वयं का प्रदर्शन लपटों के रूप में किया गया था (उत्प.15:17, निर्ग.3:2-6, 13:21-22, 19:18, 40:38, मत्ती 3:11, लूका 3:16)।
वहां पर कोई भी विश्वासी, पवित्र आत्मा की उपस्थिति के अनुभव से वंचित न था, क्योंकि लपटें अलग होकर उनमें से प्रत्येक पर आ ठहरीं।
[4] वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। All of them were filled with the Holy Spirit and began to speak in other tongues as the Spirit enabled them.
पवित्र आत्मा -
यह पवित्र आत्मा के प्रेरितों पर उतरने का त्यौहार है, जब प्रभु यीशु की मृत्यु, पुनरुत्थान एवं स्वार्गारोहण के बाद शिष्य एक साथ प्रार्थना के लिए एकत्रित थे तो पवित्र आत्मा उनमें अग्निरूपी जीभ के रूप में उतरा था (प्रेरितों 2:1-4)। वास्तव में यह कलीसिया के जन्मदिन का त्यौहार है और हम सबों के लिए अपार उल्लास और हर्ष का समय है।
पवित्र आत्मा से भरना, आत्मा के बपतिस्में से अलग है। आत्मा का बपतिस्मा प्रत्येक विश्वासी के लिए एक बार उद्धार के क्षण में होता है (प्रेरि.11:15-16, रोमि.6:3, 1कुरि.12:13, कुलु.2:12), पवित्र आत्मा की भरपूरी न केवल उद्धार के समय परन्तु उद्धार के बाद अनेक अवसरों पर भी हो सकती है (प्रेरि.4:8,31, 6:3,5, 7:55, 9:17, 13:9,52)।
पवित्र आत्मा के बपतिस्में का एक प्रमाण अन्य भाषाएं था (प्रेरि.11:15-16)। नि:संदेह ये बोली जानेवाली जीवित भाषाएं थी। प्रेरि.2:6,8 में प्रयोग हुआ शब्द “डायोलेक्ट” (dialect ) है, जिसका अर्थ “उपभाषा” या बोली है और आत्म विभोर आवाजें नहीं। (प्रेरितों अध्याय 2,10,19 और 1कुरिं.अध्याय12-14)।
इस तरह इस घटना ने कलीसिया के आरम्भ को चित्रित किया।
मत्ती 16:18 - और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।
कलीसिया एक देह के रूप में आत्मा के बपतिस्में द्वारा बनाई जाती है।
1कुरिन्थियों12:13 - क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया।
1 . सिर्फ यीशु ही हमें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा दे सकते हैं और यह परमेश्वर के वचन में विश्वास के द्वारा प्रमाणित होता है।
यूहन्ना के द्वारा लोगों को पानी से मन-फिराव का बपतिस्मा दिया गया, परंतु यीशु के द्वारा हमें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देने की आज्ञा मिली हैं (मत्ती 3:11)। मत्ती 28:19 में यीशु कहता है कि - “इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।”
प्रेरितों के काम की पुस्तक में प्रारंभिक कलीसिया के बारे में हम देख पाते हैं कि कई बार पवित्र आत्मा लोगों पर बिना उन पर हाथ रखे ही उतर आया (प्रेरित.2:1-4; प्रेरित.10:44-46)। परंतु प्रारंभिक प्रेरितों को भी पवित्र आत्मा प्रदान करने के लिए दूसरों पर हाथ रखने का निश्चित अधिकार मिला (प्रेरित.8:17; प्रेरित.19: 6)।
2. यीशु के बपप्तिस्में के बाद पवित्र आत्मा उन पर उतरा और सार्वजनिक सेवकाई के लिए दिव्य वरदानों से उन्हें अभिषिक्त किया।
जब यीशु का पानी में बपतिस्मा हुआ और पवित्र आत्मा उनके ऊपर आया, इसके बाद यीशु ने 30 वर्ष की आयु में अपनी सार्वजनिक सेवकाई आरम्भ की। यीशु ने पहले से ही 30 वर्ष तक एक परिपूर्ण और निष्पाप जीवन जिया और पवित्र आत्मा के सामर्थ द्वारा जो जन्म से ही उनके भीतर रहा। परंतु पवित्र आत्मा अब “उनके ऊपर उतर आया” । उन्हें अपने वरदानों के साथ सक्षम बनाने के लिए, जिन वरदानों की लोगों की मदद करने की उनकी सार्वजनिक सेवकाई के लिए उन्हें जरूरत पड़ी। यह महत्वपूर्ण समझें कि परमेश्वर के परिपूर्ण और निष्पाप पुत्र को उनकी सार्वजनिक सेवकाई के लिए पवित्र आत्मा द्वारा विशेष रूप से अभिशिक्त किया गया और यीशु इस सेवकाई के प्रति समर्पित हुए। उस समय तक यीशु अपने माता पिता की अधीनता में रहने की बात से संतुष्ट रहे, जब तक कि यीशु ने सार्वजनिक सेवकाई कार्य प्रारंभ नहीं किया (लूका 2:51-52)।
3. प्रेरितों के काम अध्याय 2 में चेलों के पवित्र आत्मा के साथ बपतिस्में ने उन्हें मसीह के लिए एकजुट खड़े होने में और निडर गवाह बनने में सक्षम किया।
पवित्र आत्मा के बपतिस्में ने सुसमाचार संदेश का प्रचार करने के लिए उन्हें एक विशेष अधिकार और एकता दिया। इसके बाद हम पौलुस को पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर एकजुटता में बरनबास के साथ खड़े होकर पापी लोगों के विरूद्ध अधिकार के साथ बोलते हुए देखते हैं (प्रेरितों के काम 13 :9-11)।
[5] आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रह रहे थे। Now there were staying in Jerusalem God-fearing Jews from every nation under heaven.
लूका 2:25 - और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था।
[6]जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं। When they heard this sound, a crowd came together in bewilderment, because each one heard them speaking in his own language.
पिन्तेकुस्त के दिन, जब यीशु के शिष्य पवित्र आत्मा से भर गये और वे विभिन्न भाषाओं में बोलने लगे। भीड़ इकट्ठा हो गई और हर कोई घबरा गये तथा विस्मित व आश्चर्य-चकित भी थे कि गलीली लोग उनकी अपनी-अपनी जन्मभूमि की भाषा में बोल रहे थे, जो यरूशलेम में परमेश्वर के अद्भुत काम कर रहे थे।
इस घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है:-
घटना:- पिन्तेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा का आगमन पर घटित घटना वर्णन है।
स्थान:- यरूशलेम।
कारण:- पिन्तेकुस्त के दिन, शिष्यों पर पवित्र आत्मा उतर आया और वे विभिन्न भाषाएं बोलने लगे।
लोगों की प्रतिक्रिया:- लोग घबरा गए और चकित रह गए, क्योंकि उन्हें लगा कि शिष्य उनकी अपनी भाषा में बोल रहे थे।
[7] वे सब चकित और अचम्भित होकर कहने लगे; “देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? Utterly amazed, they asked: “Are not all these men who are speaking Galileans?
जब यीशु के अनुयायी अलग-अलग भाषाओं में बोल रहे थे, तो लोग घबरा गए और अचम्भित हो गए। वे एक-दूसरे से कहने लगे, "देखो, ये लोग जो बोल रहे हैं, वे सब के सब गलीली हैं, क्योंकि वे लोग अलग-अलग भाषाओं को सुन रहे थे"।
वचन का पृष्ठभूमि यह है कि पिन्तेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा का तेज यीशु के शिष्यों पर उतरा था। जब शिष्यों ने पवित्र आत्मा की शक्ति प्राप्त की और वे विभिन्न भाषाओं में बोलने लगे, तो यरूशलेम में इकट्ठी हुई भीड़ आश्चर्य-चकित रह गई क्योंकि हर कोई अपनी ही भाषा में उन लोगों की बातें सुन रहे थे।
लोगों के आश्चर्य-चकित होने का कारण यह रहा है कि भीड़ को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि गैलील से आए लोग इतनी सारी अलग-अलग भाषाओं में कैसे बातें कर सकते थे।
[8]तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है? Then how is it that each of us hears them in his own native language?
अपनी—अपनी मातृभाषा सबको पसंद होती है क्योंकि जैसे अपनी मां का रक्त (जिन, खून और लहू) अपने शरीर में आता है, उसके साथ ही मां जो भाषा बोलती उसका विशिष्ट (Specific ) जीन भी बच्चे के शरीर में आ जाता है, इसीलिए अपनी भाषा को मातृभाषा कहा जाता है।
मातृभूमि की भाषा -
हम अपनी मातृभूमि की भाषा इसलिए सुनते हैं क्योंकि यह वह भाषा है जो हमने बचपन में अपने परिवार और परिवेश से सीखी है, जिससे हम अपनी भावनाओं और विचारों को सबसे प्रभावी ढंग से व्यक्त कर पाते हैं। इस भाषा से हमारा गहरा भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव होता है, और यह हमारी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
जन्म-भूमि से पहला जुड़ाव -
जन्म-भूमि से हमारा पहला जुड़ाव यह है कि हम अपनी मातृभाषा को बचपन में सबसे पहले सीखते हैं और यह हमारे विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सहज और प्रभावशाली माध्यम होती है।
जन्म-भमि से जुड़ी पहचान और संस्कृति -
जन्म-भमि से जुड़ी पहचान और संस्कृति तथा मातृभाषा से हमारा गहरा संबंध होता है, और यह हमारी पहचान के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जन्म-भमि से सामाजिक संबंध -
जन्म-भमि से सामाजिक संबंध में यह वह भाषा है जो हमें हमारे परिवार और समुदाय से जोड़ती है। हम अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही उस समुदाय के साथ बेहतर ढंग से जुड़ पाते हैं।
जन्म-भमि से समझ और विचारों का आदान-प्रदान:- मातृभाषा के बिना, शब्दों और कथन के अर्थ को पूरी तरह से समझना और विचारों का सही और सार्थक आदान-प्रदान करना मुश्किल हो सकता है।
[9]हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसोपोटामिया और यहूदिया और कप्पदूकिया और पुन्तुस और आसिया। Parthians, Medes and Elamites; residents of Mesopotamia, Judea and Cappadocia, Pontus and Asia,
यह प्राचीन ऐतिहासिक और भौगोलिक स्थान हैं जिसमें इन सभी विभिन्न संस्कृतियों और स्थानों को एक साथ वर्णित किया गया है।
पारथी और मेदी:- ये प्राचीन लोग थे जिन्होंने पार्थिया Empire और मेदी Empire पर शासन किया था।
एलामी:- प्राचीन ईरान के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में एक सभ्यता थी।
मेसोपोटामिया:- यह “नदियों के बीच” का क्षेत्र है, जो आज के इराक के आसपास के क्षेत्र को दर्शाता है।
यहूदिया:- यह प्राचीन इजरायल के क्षेत्र को दर्शाता है।
[10]और फ्रूगिया और पंफूलिया और मिस्र और लीबिया देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी, Phrygia and Pamphylia, Egypt and the parts of Libya near Cyrene; visitors from Rome
यह पिन्तुकोस्त के दिन यरूशलेम में मौजूद विभिन्न देशों के यहूदियों और यहूदी धर्म अपनाने वाले लोगों की सूची का एक हिस्सा है.
पिन्तुकोस्त का दिन:- यीशु के पुनरुत्थान के 50वां दिन में पवित्र आत्मा प्रेरितों और अनुयायियों पर उतर आई। इसके बाद वे विभिन्न भाषाओं में बोलना शुरू कर दिए।
अंतर्राष्ट्रीय श्रोता:- इस चमत्कार को देखने के लिए यरूशलेम में इकट्ठा हुई भीड़ में कई देशों से आए हुए लोग शामिल थे, जिनमें फ्रूगिया, पंफूलिया, मिस्र, लिबिया और रोम के लोग भी थे.
यहूदी फैलाव (diaspora):- ये सभी लोग यहूदी थे या यहूदी धर्म अपनाये हुए लोग थे, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहते थे और धार्मिक पर्व के लिए यरूशलेम आए हुए थे।
ईसाई धर्म का फैलाव:- यह घटना दर्शाती है कि ईसाई धर्म की शुरुआत से ही उसका संदेश पूरे विश्व में फैलने लगा था, क्योंकि दुनिया के कोने-कोने से आए लोगों ने अपने देशों में जाकर इस चमत्कार के बारे में बताया।
संक्षेप में, यह वचन ईसाई धर्म के वैश्विक प्रभाव को उजागर करती है, जब यरूशलेम में दुनिया के कई हिस्सों से आए लोगों ने पवित्र आत्मा के चमत्कार को अपनी-अपनी भाषाओं में अनुभव किया और माना।
[11] अर्थात् यहूदी और यहूदी मत धारण करनेवाले, क्रेती और अरबी भी हैं, परन्तु अपनी अपनी भाषा में उनसे परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं। (both Jews and converts to Judaism); Cretans and Arabs—we hear them declaring the wonders of God in our own tongues!”
पिन्तेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा के आने के बाद, विभिन्न देशों के लोग जैसे यहूदी, मत धारण करने वाले (धर्मान्तरित), क्रेती और अरबी भी, प्रेरितों को अपनी-अपनी भाषाओं में परमेश्वर के महान कार्यों के बारे में बोलते हुए सुन रहे थे। यह इस बात का प्रमाण था कि ईश्वर का आत्मा सभी पर उंडेला जा रहा था, जिससे सब लोग एक-दूसरे की भाषा समझ पा रहे थे।
वचन का संदर्भ - वचन का संदर्भ यह है कि घटना यरूशलेम में हुई थी, जहाँ पवित्र आत्मा प्रेरितों पर उतरा और वे अन्य भाषाओं में बोलने लगे।
विभिन्न क्षेत्रों के लोग - विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों में यरूशलेम के निवासी, और दूर से आए पारथी, मेदी, एलामी, मेसोपोटामिया, यहूदिया, कप्पदूकिया, पुन्तुस, आसिया, फ्रूगिया, पंफूलिया, मिस्र और लीबिया के कुरेने प्रदेश के निवासी, और रोम से आए यहूदी और यहूदी मत धारण करनेवाले (धर्मान्तरित) शामिल थे।
अचम्भित लोग - इस घटना से सभी लोग चकित हो गए और यह सुनकर हैरान थे कि वे अपनी-अपनी मातृभाषा में परमेश्वर के अद्भुत कार्य सुन सकते हैं।
पतरस का स्पष्टीकरण - जब कुछ लोग मज़ाक उड़ाने लगे कि वे नशे में हैं, तब पतरस ने समझाया कि वे नशे में नहीं हैं, बल्कि यह वही है जिसके बारे में भविष्यद्वक्ता योएल ने कहा था कि परमेश्वर अपने आत्मा को सब मनुष्यों पर उंडेलेंगे।
[12]और वे सब चकित हुए, और घबराकर एक दूसरे से कहने लगे, “ यह क्या हुआ चाहता है?” Amazed and perplexed, they asked one another, “What does this mean?
इसका तात्पर्य यह है कि लोग चकित, भ्रमित और आश्चर्यचकित थे। वे इस बात से हैरान थे कि अचानक क्या हुआ और समझ नहीं पा रहे थे।
चकित:- यह एक ऐसा भाव है जहाँ लोग किसी अविश्वसनीय घटना या दृश्य के कारण हैरान हो जाते हैं।
घबराकर:- इसका मतलब है कि लोग भ्रमित और बेचैन थे, और एक-दूसरे से इस अनपेक्षित घटना के बारे में पूछ रहे थे।
“ यह क्या हुआ चाहता है?”- यह प्रश्न इस बात पर जोर देता है कि वे घटना के अर्थ और कारण को समझने की कोशिश कर रहे थे।
यह वाक्य लोगों की आश्चर्य और भ्रम की स्थिति को दर्शाता है, जब वे किसी ऐसी घटना का सामना करते हैं जिसकी वे उम्मीद नहीं कर रहे थे।
[13]परन्तु दूसरों ने ठट्ठा करके कहा, “ वे तो नई मदिरा के नशे में हैं।” Some, however, made fun of them and said, “They have had too much wine.”
यहाँ यहूदियों की एक प्रतिक्रिया का वर्णन किया गया है कि जब वे प्रेरितों को पवित्र आत्मा से भरे हुए और अलग-अलग भाषाओं में बोलते हुए देखते हैं। और उनका मानना था कि यह “नई मदिरा के नशे” के कारण हो रहा है। हालाँकि, पतरस ने इस गलत धारणा का खंडन किया और समझाया कि वे परमेश्वर के आत्मा से भरे हुए थे।
प्रतिक्रिया:- भीड़ में से कुछ लोगों ने इसे नहीं समझा और उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “वे तो नई मदिरा के नशे में हैं”।
पतरस का खंडन:- पतरस ने भीड़ को संबोधित किया और समझाया कि वे नशे में नहीं हैं, बल्कि यह भविष्यवाणी के पूरा होने का एक हिस्सा है, जैसा कि भविष्यद्वक्ता योएल ने भविष्यवाणी की थी [प्रेरि.2:14-20]
1 कुरिन्थियों 14:23 – अतः यदि कलीसिया एक जगह इकट्ठी हो, और सब के सब अन्य अन्य भाषा बोलें, और बारहवाले या अविश्वासी लोग भीतर आ जाएं तो क्या वे तुम्हें पागल न कहेंगे?
निष्कर्ष :- वचन के सन्दर्भ में यह घटना यरूशलेम में पिन्तेकुस्त के दिन घटित हुई, जब प्रेरितों ने पवित्र आत्मा को प्राप्त किया और वे विभिन्न भाषाओं में बोलने लगे। आज हम पवित्र आत्मा के काल में है। पवित्र आत्मा अपनी उपस्थिति से इस संसार को पवित्र करता है, वह कलीसिया को एक नई दिशा में आगे बढ़ने को प्रेरित करता है, और प्रभु यीशु के द्वारा हमें सौंपे गए मिशन को पूरा करने में सहायता करता है। जब तक हम आत्मा में जन्म न लें तब तक हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर पायेंगे। आइए हम, स्वर्ग और पृथ्वी पर विराजनमान परमेश्वर पिता से प्रार्थना करें कि हमें अपनी आत्मा से भर दे, और पवित्र आत्मा हम में अपनी शक्ति व सामर्थ्य दे दे कि हमें पवित्र बना दे।
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