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दुःख में शान्ति [Peace in Sorrow ]
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यूहन्ना 14:1,27 -
[1] तुम्हारा मन व्याकुल न हो; परमेश्वर पर विश्वास रखो और मुझ पर भी विश्वास रखो।
[27] मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूंं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
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यशायाह 41:10 - मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा।
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यशायाह 51:12 - मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरनेवाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झानेवाले आदमी से डरता है।
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इब्रानियों 12:6-7 -
[6]क्योंकि प्रभु, जिससे प्रेम करता है, उसकी ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है।
[7]तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो; परमेश्वर तुम्हें पुत्र जानकर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है। वह कौन सा पुत्र है जिसकी ताड़ना पिता नहीं करता?
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1 पतरस 2:19-20 -
[19]क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार करके अन्याय से दुःख उठाता हुआ क्लेश सहता है तो यह सुहावना है।
[20]क्योंकि यदि तुम ने अपराध करके घूंसे खाए और धीरज धरा, तो इसमें क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम करके दुःख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है।
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याकूब 1:2-4 -
[2] हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो, तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो,
[3] यह जानकर कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है।
[4] पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
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