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स्वर्णिम नियम《Golden Providence》
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स्वर्णिम नियम --> दूसरों के साथ, जैसा व्यवहार चाहते हो ; तुम भी उनके साथ वैसा ही किया करो ।यही संहिता और नबियों की शिक्षा है।
---Mt. 7: 12.
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इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो ; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं की शिक्षा यही है ।
--Mt.7 : 12.
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